प्रयोग के नये रंग हबीब के संग

Authors

  • डाॅ. मंजुला पाण्डेय Author

Keywords:

नाटक, अभिनेता, कलाकार, मंच, विकास, प्रस्तुतीकरण, रंगमंच, अभिनेत्री, नाटक, आलेख, मंचन, पर्दा

Abstract

हम सभी हबीब तनवीर को निर्देशक, अभिनेता एवं संगठनकर्ता के रूप में पहचानते हैं एक  नाटककार के रूप में नहीं जानते क्योंकि उन्होंने कभी भी नाटक सीखकर उसे मंच में प्रस्तुतीकरण के लिए तैयार नहीं किया, उनके नाटक वस्तुतः नाट्य आलेख है जो छपने के लिए नहीं बल्कि प्रस्तुतीकरण के लिए ही बनाये गये हैं, और स्थिर न होकर प्रदर्शन के हिसाब से परिवर्तनशील भी हैं। इसलिए साहित्यकार भी उनके नाटकों को ‘नाटक‘ के रूप में मान्यता नहीं दे पाये। वास्तव में वे रंगमंच के नाटकार थे वे जैसा नाटक प्रस्तुत करना चाहते थे वैसा नाटक आधुनिक नाटककार लिखने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने स्वम् ही प्रयोग के साथ नाट्य लेखन को स्वीकार कर लिया।   

Author Biography

  • डाॅ. मंजुला पाण्डेय

    सहायक प्राध्यापक, हिन्दी विभाग, शासकीय जे.पी. वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.)

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Published

14-01-2026

How to Cite

प्रयोग के नये रंग हबीब के संग. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 25-34. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/224