प्रयोग के नये रंग हबीब के संग
Keywords:
नाटक, अभिनेता, कलाकार, मंच, विकास, प्रस्तुतीकरण, रंगमंच, अभिनेत्री, नाटक, आलेख, मंचन, पर्दाAbstract
हम सभी हबीब तनवीर को निर्देशक, अभिनेता एवं संगठनकर्ता के रूप में पहचानते हैं एक नाटककार के रूप में नहीं जानते क्योंकि उन्होंने कभी भी नाटक सीखकर उसे मंच में प्रस्तुतीकरण के लिए तैयार नहीं किया, उनके नाटक वस्तुतः नाट्य आलेख है जो छपने के लिए नहीं बल्कि प्रस्तुतीकरण के लिए ही बनाये गये हैं, और स्थिर न होकर प्रदर्शन के हिसाब से परिवर्तनशील भी हैं। इसलिए साहित्यकार भी उनके नाटकों को ‘नाटक‘ के रूप में मान्यता नहीं दे पाये। वास्तव में वे रंगमंच के नाटकार थे वे जैसा नाटक प्रस्तुत करना चाहते थे वैसा नाटक आधुनिक नाटककार लिखने में असमर्थ थे, इसलिए उन्होंने स्वम् ही प्रयोग के साथ नाट्य लेखन को स्वीकार कर लिया।
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