भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में श्री बंकिम चंद्र चटर्जी का योगदान

Authors

  • डॉ. शचि शुक्ला Author

Keywords:

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, श्री बंकिम चंद्र चटर्जी, योगदान

Abstract

भारत की आजादी एक लंबे स्वाधीनता आंदोलन की देन है इसमें तत्कालीन राजनेताओं, राजा महाराजाओं के अलावा साहित्यकारों, कवियों, वकीलों, विद्यार्थियों का उल्लेखनीय योगदान रहा है। इस स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रहे साहित्यकारों ने ’वंदे मातरम’ गीत के द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में नई जान फूंकी तथा भारतीय साहित्य, भाषाओं को प्रबल कर नए आयाम स्थापित किए। ऐसे ही एक स्वतंत्रता सेनानी के द्वारा 1874 में लिखा गया एक अमर गीत ’वंदे मातरम’ न केवल भारतीय स्वाधीनता संग्राम का मुख्य नारा बना बल्कि यह आधुनिक समय में देश का राष्ट्रगीत भी है। इस गीत को रचकर बंकिम चंद्र चटर्जी सदैव इतिहास में अमर हो गए हैं। 14 अगस्त 1947 को संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू के ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण से कुछ मिनट पहले सुचेता कृपलानी ने वंदे मातरम गाया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान रंगमंच, कला का वह रूप था जिसने सर्वप्रथम राष्ट्रवादी संदेशों को फैलाने हेतु संगीत का सहारा लिया। उस समय रंगमंच, सिनेमा, ग्रामोफोन जो की प्रचार के तीन माध्यम हुआ करते थे, को प्रशासन की कड़ी नाराजगी सहनी पड़ती थी। नाटकों की स्क्रिप्ट को मंजूरी लेने की आवश्यकता होती थी और उनके प्रदर्शन के समय अक्सर पुलिस मौजूद रहा करती थी। फिल्मों के गीत, राष्ट्रवादी संदेशों आदि की पूरी जांच होती थी तथा उसके बाद ही मंजूरी मिलती थी। इतनी कड़ी शासन व्यवस्था होने के बावजूद भी भारतीय संगीत के कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में अपनी भूमिका निभाई। संगीत ने सदैव ही देश को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य किया है। एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी और दिलीप कुमार राय की वंदे मातरम डिस्क, मुसीरी सुब्रमण्यम अय्यर द्वारा दूर दराज के देशों में भारतीय बंधुआ मजदूरों की दुर्दशा को अपने गीतों द्वारा व्यक्त करना तथा लोगों को भावुक कर देना, स्वर्गीय लता मंगेशकर, स्वर्गीय मोहम्मद रफी द्वारा गाए गए राष्ट्रीय एकता के गीत आज भी हमारी आंखें नम कर देते हैं और हमें अपने देश पर गर्व होने लगता है। यही संगीत की ताकत है 77 साल बाद भी इन कलाकारों के राष्ट्रभक्ति के गीत हमें भावुक कर देते हैं।

Author Biography

  • डॉ. शचि शुक्ला

    सहायक प्राध्यापिका, संगीत गायन, आर्य गर्ल्स  कॉलेज, अंबाला छावनी, हरियाणा

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Published

15-08-2024

How to Cite

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में श्री बंकिम चंद्र चटर्जी का योगदान. (2024). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 87-92. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/154

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