महिलाओं के आर्थिक स्थिति के उन्नयन में स्व-सहायता समूह की भूमिका
Keywords:
स्व-सहायता समूह, महिलाओं की आर्थिक स्थिति , लाभ , बैंक खाता , गतिविधियां , व्यावसायिक संरचनाएंAbstract
‘स्व-सहायता समूह’ एक ऐसा माध्यम बनकर उभरा है जिसके जरिए महिलाएँ अपने समय का समुचित उपयोग कर आर्थिक और मानसिक रूप से स्वावलंबी बन रही हैं। ग्रामीण महिलाएँ इन समूहों से जुड़कर न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि इससे उनमें स्वावलंबन की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। स्व-सहायता समूह कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस कार्यक्रम की वजह से महिलाओं की स्थिति एवं दशा में सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक दृष्टिकोण से क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं। स्व-सहायता समूह के जरिए लघु वित्त प्राप्त करके महिलाएँ गरीबी, बेरोजगारी एवं निरक्षरता के चक्रव्यूह से निकलकर महिलाएँ सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
स्वयंसेवी संगठन एवं स्व-सहायता समूह की गतिविधियों से केवल महिलाओं के ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण ग्रामीण समुदाय में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। उनमें एक अच्छी परम्पराएँ विकसित होने के साथ-साथ उनकी आजीविका भी सुदृढ़ हुई है। अब ग्रामीण लोग मानने लगे हैं कि कुरीतियाँ उनके सामाजिक एवं आर्थिक विकास में बाधक हैं और उनका यह मानना अपने आप में एक बहुत बड़ा बदलाव है।
छत्तीसगढ़ राज्य के मुंगेली जिले में महिला स्व-सहायता समूह का अध्ययन प्रासंगिक है। प्रस्तुत शोध अध्ययन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के आर्थिक स्थिति के उन्नयन में स्व-सहायता समूह की भूमिका का अध्ययन कर कमियों और विकास को रेखांकित कर उपयुक्त सुझाव प्रस्तुत करना है। अतः अध्ययन मुंगेली जिले के विशेष संदर्भ पर आधारित है। इस शोध पत्र के उद्देश्य के प्राप्ति हेतु प्राथमिक एवं द्वितीयक स्त्रोतों का प्रयोग किया गया है।
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