भारतीय संस्कृति में मानसिक रोग से जुड़ा कलंक और सामाजिक अलगाव

Authors

  • बबीता कुमारी Author

Keywords:

मानसिक रोग कलंक, सामाजिक अलगाव, भारतीय संस्कृति, उपचार अंतराल, मानसिक स्वास्थ्य नीति, सामुदायिक मनोविज्ञान, सांस्कृतिक कलंक, भारतीय समाज

Abstract

यह शोध पत्र भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ में मानसिक रोग से जुड़े कलंक (स्टिग्मा) और सामाजिक अलगाव की जटिल परिघटना का व्यापक एवं गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत जैसे सांस्कृतिक विविधता से परिपूर्ण देश में, जहाँ धर्म, जाति, परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम है, वहाँ मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज का दृष्टिकोण अत्यंत जटिल और बहुआयामी है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2015-16) के अनुसार, भारत में लगभग 15 करोड़ लोग किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित हैं, परंतु उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक को उचित उपचार नहीं मिल पाता। इस विशाल उपचार अंतराल (ट्रीटमेंट गैप) के मूल में कलंक और सामाजिक अलगाव की भूमिका केंद्रीय है। इस शोध में द्वितीयक आंकड़ों, पूर्व-प्रकाशित अध्ययनों तथा सांस्कृतिक-समाजशास्त्रीय सिद्धांतों के आलोक में यह विश्लेषण किया गया है कि किस प्रकार भारतीय समाज में मानसिक रोग को लेकर व्याप्त भ्रांतियाँ, पारंपरिक मान्यताएं और सामाजिक संरचनाएं रोगियों को बहुआयामी अलगाव की ओर धकेलती हैं। शोध के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि कलंक निवारण के लिए समग्र एवं सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है।

Author Biography

  • बबीता कुमारी

    शोध छात्रा, स्नातकोत्तर मनोविज्ञान बिभाग, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर

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Published

25-03-2026

How to Cite

भारतीय संस्कृति में मानसिक रोग से जुड़ा कलंक और सामाजिक अलगाव. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 118-127. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/248

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