पद्म क्षेत्र राजिम एवं संबंधित ग्रामों के नामका ऐतिहसिक एवं पुरातात्विक विवेचन

Authors

  • डॉ संध्या शर्मा Author

Keywords:

पद्म क्षेत्र राजिम, ऐतिहसिक, पुरातात्विक विवेचन

Abstract

वैष्णव, शैव और शाक्त धर्म, पैरी, सोंदूर और महानदी के संगम स्थल के तट पर बसा राजिम प्राचीन काल से ही दक्षिण कोसल का प्रमुख ऐतिहासिक धार्मिक और सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। नगर, ग्राम्य एवम् वन्य जीवन इस स्थान के आसपास झलकता है। यहाँ की प्राचीन संस्कृति भी मूलतः लोकजीवन की अनेक उपलब्धियां संचित करती हुई सी प्रतीत होती हैं।

राजिम के नामकरण के संबंध में अनेक मत-मतान्तर दिखाई पड़ते हैं। अधिकांश विद्वान राजिम को राजीव का विकृत रूप मानते हैं। इस संबंध में वे राजीवलोचन से भगवान विष्णु के विरूद का आशय स्वीकार करते हैं। ठाकुर विष्णु सिंह ने "राजिम" के नाम की ऐतिहासिकता पर विचार करते हुए यह स्पष्ट किया है कि राजिम लोचन (देव) के नाम पर ही इस स्थान का नाम राजिम पड़ा है।'

Author Biography

  • डॉ संध्या शर्मा

    सहायक प्राध्यापक (अतिथि), प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवम् पुरातत्त्व अध्ययनशाला, पं रविशंकर शुक्ल वि वि रायपुर छत्तीसगढ़

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Published

11-04-2026

How to Cite

पद्म क्षेत्र राजिम एवं संबंधित ग्रामों के नामका ऐतिहसिक एवं पुरातात्विक विवेचन. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 162-166. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/254

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