छत्तीसगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण विकास की चुनौतियाँ एवं संभावनाएँः बिलासपुर जिले पर आधारित अध्ययन
Keywords:
पंचायती राज, ग्रामीण विकास, विकेन्द्रीकरण, जनभागीदारी, बिलासपुर जिला, छत्तीसगढ़Abstract
भारत में ग्रामीण विकास की अवधारणा लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण और स्थानीय स्वशासन से गहराई से जुड़ी हुई है। पंचायती राज व्यवस्था को ग्रामीण समाज के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम माना जाता है। 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के पश्चात् पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया, जिससे ग्राम स्तर पर विकास योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में जनभागीदारी को बढ़ावा मिला। छत्तीसगढ़ राज्य, जो मुख्यतः ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्र है, वहाँ पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रस्तुत शोध-पत्र में छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले के विशेष संदर्भ में पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से ग्रामीण विकास की चुनौतियों एवं संभावनाओं का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार पंचायती राज संस्थाएँ ग्रामीण विकास की योजनाओं को प्रभावी बना सकती हैं तथा किन संरचनात्मक, प्रशासनिक और सामाजिक बाधाओं के कारण अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं।
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