छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयीन पुस्तकालयों में सूचना साक्षरता कार्यक्रमों की भूमिकाः विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास का एक अध्ययन

Authors

  • डाॅ. चन्द्रसेन जांगड़े Author

Keywords:

सूचना साक्षरता, महाविद्यालयीन पुस्तकालय, डिजिटल साक्षरता, सूचना खोज, ई-संसाधन, विद्यार्थी, छत्तीसगढ़।

Abstract

वर्तमान सूचना एवं डिजिटल युग में विद्यार्थियों के सामने उपलब्ध सूचना की मात्रा निरंतर बढ़ रही है। इंटरनेट, ई-पुस्तक, ई-जर्नल, ऑनलाइन डेटाबेस, सोशल मीडिया तथा विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से बड़ी मात्रा में सूचना उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में केवल सूचना तक पहुँच प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही सूचना की पहचान, खोज, मूल्यांकन, चयन, उपयोग तथा उचित संदर्भ प्रदान करने की क्षमता भी आवश्यक है। इसी क्षमता को सूचना साक्षरता कहा जाता है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के चयनित महाविद्यालयीन पुस्तकालयों में संचालित सूचना साक्षरता गतिविधियों की स्थिति, विद्यार्थियों की सूचना साक्षरता के स्तर, पुस्तकालय द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण तथा इन कार्यक्रमों के विद्यार्थियों के शैक्षणिक कार्य पर प्रभाव का अध्ययन करना है। अध्ययन के लिए वर्णनात्मक एवं सर्वेक्षण पद्धति का उपयोग किया गया है। नमूना अध्ययन में 20 महाविद्यालयों तथा 200 विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। अध्ययन के नमूना आँकड़ों से संकेत मिलता है कि विद्यार्थियों में इंटरनेट एवं डिजिटल संसाधनों के उपयोग की क्षमता अपेक्षाकृत अच्छी है, लेकिन विश्वसनीय स्रोत की पहचान, शोध डेटाबेस का उपयोग, संदर्भ प्रबंधन तथा सूचना के आलोचनात्मक मूल्यांकन में अतिरिक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता है। सूचना साक्षरता कार्यक्रमों में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का शैक्षणिक कार्य, सूचना खोजने की क्षमता और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपेक्षाकृत अधिक पाया गया।

 

Author Biography

  • डाॅ. चन्द्रसेन जांगड़े

    सहायक प्राध्यापक, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग, डाॅ. सी. व्ही. रामन विश्वविद्यालय, करगी रोड कोटा, बिलासपुर (छ.ग.)

     

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Published

29-07-2025

How to Cite

छत्तीसगढ़ के महाविद्यालयीन पुस्तकालयों में सूचना साक्षरता कार्यक्रमों की भूमिकाः विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास का एक अध्ययन. (2025). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 349-361. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/350

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