बांग्ला भाषा की विकास-धारा: प्राकृत–अपभ्रंश से आधुनिक काल तक

Authors

  • डॉ. परिमल मण्डल Author

Keywords:

बांग्ला भाषा, भाषिक विवर्तन, प्राकृत, अपभ्रंश, मगधी प्राकृत, प्राचीन बांग्ला, मध्य बांग्ला, आधुनिक बांग्ला, भाषातत्त्व, शब्दभाण्डार

Abstract

बांग्ला भाषा इन्दो-आर्य भाषा-परिवार की एक महत्वपूर्ण भाषा है, जिसका विकास एक दीर्घकालीन ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है। प्राचीन, मध्य एवं आधुनिक चरणों से होकर बांग्ला भाषा ने अपने भाषिक स्वरूप, शब्दभण्डार तथा साहित्यिक अभिव्यक्ति में निरन्तर परिवर्तन और परिपक्वता प्राप्त की है। संस्कृतजन्य, देशज तथा विदेशी तत्वों के समन्वय ने बांग्ला भाषा को एक समृद्ध और जीवन्त भाषा के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इस शोधपत्र में बांग्ला भाषा की विकास-धारा का प्राकृत और अपभ्रंश चरण से लेकर आधुनिक काल तक ऐतिहासिक एवं भाषातात्त्विक दृष्टिकोण से संक्षेप में विश्लेषण किया गया है।

Author Biography

  • डॉ. परिमल मण्डल

    सहायक अध्यापक, संस्कृत विभाग, स्वर्णमयी जोगेन्द्रनाथ महाविद्यालय, आमदावाद, नन्दीग्राम, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिमबङ्गाल

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Published

29-12-2025

How to Cite

बांग्ला भाषा की विकास-धारा: प्राकृत–अपभ्रंश से आधुनिक काल तक. (2025). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 138-145. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/218

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