बाजरे के रूप में मोटे अनाज का उपयोग स्वास्थ्य के लिए एक नई दिशा और अन्य व्यवसायिक रूप में इसकी उपलब्धता
Keywords:
स्वास्थ्य , बाजरे , मोटे अनाजAbstract
पुराने समय में भारतीय लोगों का भोजन रहे मोटे अनाज सुपर फ़ूड के नाम से जाने जाते हैं। मोटे अनाज अत्यधिक पोषक, अम्ल-रहित, ग्लूटेन मुक्त और आहार गुणों से युक्त होते हैं। इसके अलावा, बच्चों और किशोरों में कुपोषण खत्म करने में मोटे अनाज का सेवन काफी मददगार होता है क्योंकि इससे प्रतिरक्षा और स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है।
मोटे अनाज के अंतर्गत आठ फसलें शामिल हैं। इसमें ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू को मोटा अनाज की फसल कहा जाता है। ये फसलें आम तौर पर सीमांत और असिंचित भूमि पर उगाई जाती हैं, इसलिए इनकी उपज स्थायी खेती और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करती है। सरकार के प्रोत्साहन और स्वास्थ्य के प्रति लोगों की सजगता बढ़ने से इनकी खरीद बढ़ी है। खरीद बढ़ने से लाभान्वित होने वाले किसानों की संख्या भी बढ़ी है।
भारत में परंपरागत रूप से मोटे अनाज का उत्पादन होता रहा हैं। हालांकि, कृषि क्षेत्र में आधुनिकीकरण और मशीनीकृत कृषि उपकरण और अधिक उपज वाले बीज आ गए जिसके बाद लोगों का रुझान चावल और गेहूं के उत्पादन के प्रति बढ़ गया। परिणामस्वरूप मोटे अनाज की खपत और खेती दोनों सीमित हो गई। समय ने एक और करवट ली और बदली जलवायु परिस्थितियों के कारण लोगों ने फिर इन अनाजों को उत्पादन करना शुरू किया। मोटे अनाज की फसल में अन्य समान फसल की तुलना में कम जल और कृषि साधनों (इनपुट) की जरूरत होती है। हमारे देश में, मोटे अनाज मुख्य रूप से खराब कृषि जलवायु क्षेत्रों, विशेष रूप से देश के वर्षा क्षेत्रों में उगाए जाते हैं। इन फसलों को उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में उगाया जाता है और उन्हें शुष्क भूमि फसल कहा जाता है क्योंकि इन्हें 50-100 सेमी वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। ये फसलें मिट्टी की कमियों के प्रति कम संवेदनशील होती हैं और इन्हें कम जलोढ़ या लोमी मिट्टी में उगाया जा सकता है। उन्हें पानी, उर्वरक और कीटनाशकों की भी न्यूनतम आवश्यकता होती है। मोटे अनाज की खेती कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करती है जो आज एक वैश्विक समस्या है।
इसके अलावा मोटे अनाज देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा में बड़े पैमाने पर योगदान करते हैं। इन्हें न्यूट्री-सीरियल्स के रूप में जाना जाता है क्योंकि ये मानव शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक अधिकांश पोषक तत्व प्रदान करते हैं। मोटे अनाज में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) होता है और यह मधुमेह की रोकथाम से भी मददगार होता है। ये आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे खनिजों का अच्छा स्रोत हैं। मोटे अनाज वजन कम करने और उच्च रक्तचाप में मददगार होते हैं। इनका आम तौर पर फलियों के साथ सेवन किया जाता है, जो प्रोटीन युक्त होता है।
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