शिक्षा प्रणाली में सोच को प्रेरित करने की प्रक्रिया एवं उसका शिक्षार्थियों के बौद्धिक विकास पर प्रभाव

Authors

  • डॉ. संगीता पाठक Author

Keywords:

शिक्षण विधियाँ, आलोचनात्मक सोच, समस्या-समाधान, रचनात्मकता, बौद्धिक विकास

Abstract

यह शोध शिक्षा प्रणाली में सोच को प्रेरित करने वाली शिक्षण विधियों तथा उनके शिक्षार्थियों के बौद्धिक विकास पर प्रभाव का विश्लेषण करता है। अध्ययन का उद्देश्य आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान, रचनात्मकता एवं चिंतन-आधारित अधिगम जैसी शिक्षण रणनीतियों की भूमिका की पहचान करना है। यह शोध राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा चयनित शैक्षणिक साहित्य पर आधारित द्वितीयक स्रोतों के व्यवस्थित विश्लेषण के माध्यम से संपन्न किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि अनुभवात्मक, परियोजना-आधारित, समस्या-आधारित एवं सहयोगात्मक शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों की संज्ञानात्मक क्षमताओं, नवाचार प्रवृत्ति तथा वास्तविक जीवन की समस्याओं से निपटने की क्षमता को सुदृढ़ करती हैं। चिंतन-आधारित अधिगम शिक्षार्थियों में मेटाकॉग्निटिव जागरूकता, आत्म-निर्णय क्षमता एवं गहन अधिगम को बढ़ावा देता है, जिससे उनका बौद्धिक विकास अधिक प्रभावी होता है। शोध निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि यदि पाठ्यक्रम, मूल्यांकन प्रणाली एवं शिक्षण-प्रक्रिया में सोच-उन्मुख एवं नवाचारी दृष्टिकोणों को अपनाया जाए, तो विद्यार्थियों का समग्र बौद्धिक एवं व्यक्तित्व विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

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Published

05-02-2026

How to Cite

शिक्षा प्रणाली में सोच को प्रेरित करने की प्रक्रिया एवं उसका शिक्षार्थियों के बौद्धिक विकास पर प्रभाव. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 94-105. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/234

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