सिंगफो बोली के संदर्भ में देवनागरी की संभावनाएँ

Authors

  • जाइंङको सिंग्फो Author

Keywords:

सिंगफो बोली , देवनागरी , संभावनाएँ, अरुणाचल प्रदेश; भाषा; लिपि

Abstract

अरुणाचल प्रदेश एक जनजातीय प्रदेश है और इसमें मुख्‍य रूप से 26 जनजातियाँ निवास करती हैं। 'सिंगफो' जनजाति यहाँ की एक प्रमुख जनजाति है जो चाङलाङ और नामसाई जिलों के साथ-साथ असम के तीनसुकिया जिले के मारघेरिता और शिवसागर जिले के सोनारी क्षेत्र में बसी हुई है। इसके अलावा सिंगफो बोलने वाले लोग जोरहाट, गोलाघाट और कारबी आङलोङ जिलों के कुछ क्षेत्रों में भी मिलते हैं।

भाषा मानव समाज के लिए ऐसा बहुमूल्‍य साधन हैं, जिसके माध्‍यम से प्रत्‍येक मनुष्‍य अपने मन के विचार विकारों को दूसरे के सम्‍मुख भली-भाँति अभिव्‍यक्‍त कर सकता है। इसी तरह लिपि के बिना भाषा की स्‍पष्‍ट अभिव्‍यक्ति संभव नहीं है। प्रत्‍येक भाषा को व्‍यक्‍त करने के लिए लिपि की आवश्‍यकता होती है। सिंगफो भाषा की अपनी कोई लिपि नहीं थी इसलिए सन् 1895 में डॉ. ओला हेनसन द्वारा विकसित रोमन लिपि को ही सिंगफो समुदाय के लोगों ने अपनाया। इस लिपि को केवल अरुणाचल प्रदेश के सिंगफो ही प्रयोग में लाते हैं ऐसा नहीं है बल्कि पूरे विश्‍व में म्‍यानमार, चीन, काचीन आदि सभी जगहों पर सिंगफो इसी रोमन लिपि का प्रयोग करते हैं।

Author Biography

  • जाइंङको सिंग्फो

    अतिथि संकाय, हिन्‍दी, रांग फ्राह शासकीय महाविद्यालय, चांगलांग, अरुणाचल प्रदेश 

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Published

04-08-2025

How to Cite

सिंगफो बोली के संदर्भ में देवनागरी की संभावनाएँ. (2025). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 314-319. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/231

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