राजसमंद जिले में खनन की प्रक्रिया व मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का भौगोलिक अध्ययन
Keywords:
राजसमंद, खनन, पारिस्थितिकी तंत्र, संगमरमर, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जैव-विविधता, भूमि क्षरण, सतत खननAbstract
राजसमंद जिला राजस्थान के महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में से एक है, जहाँ संगमरमर सहित विभिन्न खनिजों का उत्खनन किया जाता है। खनन क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, रोजगार तथा औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र पर अनेक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव भी दिखाई देते हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य राजसमंद जिले में खनन गतिविधियों के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का भौगोलिक अध्ययन करना है। अध्ययन में खनन की विभिन्न विधियों तथा विशेष रूप से खुले खनन से भूमि, जल, वायु, मृदा, वनस्पति और जैव-विविधता में होने वाले परिवर्तनों को दिखाया गया है। खनन गतिविधियों से उत्पन्न मलबा एवं अवसाद जल स्रोतों तक पहुँचने से जल की गुणवत्ता तथा जल-प्रवाह प्रभावित होता है, जबकि ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, खुदाई, क्रशिंग और खनिज परिवहन से धूल एवं सूक्ष्म कणों की मात्रा बढ़ती है।
अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि खनन क्षेत्र में प्राकृतिक आवास का विनाश एवं विखंडन, वनस्पति आवरण में कमी तथा स्थानीय जैव-विविधता पर दबाव जैसी पारिस्थितिक चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। खनन से संबंधित धूल, शोर और अन्य गतिविधियाँ आसपास की आबादी तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती हैं। अतः राजसमंद जिले में खनिज संसाधनों के आर्थिक उपयोग के साथ पर्यावरणीय संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, खनन-क्षेत्र का पुनर्वास, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा जैव-विविधता संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
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