भारतीय संस्कृति में नैतिक शिक्षा का महत्व और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता

Authors

  • सविता जोशी Author
  • डॉ. मीना सिरोला Author

Keywords:

भारतीय संस्कृति, नैतिक शिक्षा, हिंदी साहित्य, मूल्य शिक्षा, शिक्षा नीति 2020, सामाजिक नैतिकता, रामायण, प्रेमचंद, व्यवहारिक नैतिकता, साहित्य और मूल्य।

Abstract

भारतीय संस्कृति का मूल आधार नैतिकता, धर्म, संयम और सह-अस्तित्व जैसे मानवीय मूल्यों पर टिका है। यह संस्कृति केवल धार्मिक क्रियाओं या दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नैतिक व्यवहार और मूल्यबोध को महत्व देती है। भारतीय साहित्य—चाहे वह प्राचीन वेद, उपनिषद हों या आधुनिक युग के लेखक—इन मूल्यों को व्यक्त करने और समाज में प्रसारित करने का सशक्त माध्यम रहा है। इस शोध-पत्र का उद्देश्य है साहित्य में निहित नैतिक मूल्यों को उजागर करना तथा यह विश्लेषण करना कि आज के सामाजिक और शैक्षणिक संदर्भ में ये मूल्य कितने प्रासंगिक हैं।

रामायण में राम का मर्यादा पालन, महाभारत में युधिष्ठिर की सत्यनिष्ठा, और गीता में अर्जुन को दिया गया कर्मयोग का संदेश नैतिक शिक्षा के शाश्वत उदाहरण हैं। वहीं आधुनिक हिंदी साहित्यकार जैसे प्रेमचंद ने ‘पूस की रात’ और ‘सद्गति’ जैसी कहानियों में सामाजिक न्याय और मानवीय करुणा को स्थान दिया है। महादेवी वर्मा के निबंधों में करुणा, सहानुभूति और स्त्री-सशक्तिकरण के नैतिक पहलू मिलते हैं। इन साहित्यिक कृतियों ने न केवल अपने समय की सामाजिक सच्चाइयों को दर्शाया, बल्कि पाठकों के भीतर नैतिक विवेक को भी जागृत किया।

वर्तमान समय में जब नैतिक मूल्यों का क्षरण, उपभोक्तावाद, और सामाजिक असंतुलन गहराता जा रहा है, तब नैतिक शिक्षा की पुनर्स्थापना अत्यंत आवश्यक हो गई है। नई शिक्षा नीति 2020 में नैतिक शिक्षा को पाठ्यचर्या में सम्मिलित करने की बात की गई है, लेकिन इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए साहित्य का सहारा लेना आवश्यक है। साहित्य भावनाओं को स्पर्श करता है और नैतिकता को व्यवहार में परिणत करने की क्षमता रखता है। अतः इस शोध में यह स्पष्ट किया गया है कि नैतिक शिक्षा को केवल एक विषय के रूप में नहीं, बल्कि जीवन शैली के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

Author Biographies

  • सविता जोशी

    शोधकर्ती, शिक्षाशास्त्र विभाग, वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर - राजस्थान (भारत)

  • डॉ. मीना सिरोला

    पर्यवेक्षक, सह आचार्य, शिक्षाशास्त्र विभाग, वनस्थली विद्यापीठ, जयपुर - राजस्थान (भारत) 304022

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Published

20-08-2025

How to Cite

भारतीय संस्कृति में नैतिक शिक्षा का महत्व और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता. (2025). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 265-277. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/170

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