आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य में लोकतत्त्वीय प्रवृत्तियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • दीपक कुमार Author
  • डॉ. ममता रानी Author

Keywords:

छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य, लोकतत्त्व, लोकसंस्कृति, लोकभाषा, लोककथा, लोकविश्वास, लोकाचार, कृषि-संस्कृति, सामुदायिक चेतना, लोक-अस्मिता, आधुनिकता।

Abstract

छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य का विकास छत्तीसगढ़ के लोकजीवन, लोकसंस्कृति, लोकभाषा और सामुदायिक जीवन-व्यवस्था की सुदृढ़ पृष्ठभूमि में हुआ है। आधुनिक छत्तीसगढ़ी कहानी ने परंपरागत लोककथा की कथात्मकता को ग्रहण करते हुए उसे समकालीन सामाजिक यथार्थ, आर्थिक विषमता, स्त्री-जीवन, श्रम-संस्कृति, कृषि-जीवन, प्रकृति-बोध, सामाजिक रूढ़ियों और सांस्कृतिक अस्मिता के प्रश्नों से जोड़ा है। इसलिए आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य का लोकतत्त्वीय अध्ययन केवल लोक-सामग्री की पहचान तक सीमित न रहकर उसके सामाजिक, सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक अर्थों की खोज भी करता है।

प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य में लोकभाषा, लोककथा, लोकविश्वास, लोकाचार, लोकपर्व, लोकगीत, कृषि-संस्कृति, प्रकृति-बोध, सामुदायिक चेतना, लोकनैतिकता तथा लोक-अस्मिता जैसी प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना है। अध्ययन में पं. श्यामलाल चतुर्वेदी की ‘भोलवा-भोलाराम बनिस’ तथा ‘पतिबरता के पानी’, डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के सुसक झन कुररी सुरता ले, कुबेर के भोलापुर के कहानी, कहा नहीं और छत्तीसगढ़ी कथा-कंथली, नील पटेल के माटी के करजा तथा डॉ. जयभारती चंद्राकर के शहीद के गांव जैसे कथा-संदर्भों को आधार बनाया गया है। उपलब्ध साहित्यिक स्रोतों में इन कृतियों को छत्तीसगढ़ी कथा-साहित्य की लोककथात्मक, सामाजिक और समकालीन प्रवृत्तियों के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण माना गया है।

अध्ययन से निष्कर्ष प्राप्त होता है कि आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा में लोक कोई स्थिर या संग्रहालयीय वस्तु नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक जीवन के साथ निरंतर पुनर्गठित होने वाली सांस्कृतिक चेतना है। कथाकार लोकपरंपरा का संरक्षण करते हुए उसके भीतर उपस्थित रूढ़ियों की आलोचना भी करता है। इस प्रकार लोक आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा में स्थानीयता, सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक आलोचना और मानवीय संवेदना—चारों का आधार बनकर उपस्थित होता है।

Author Biographies

  • दीपक कुमार

    शोध छात्र (हिन्दी), कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर, छत्तीसगढ़

  • डॉ. ममता रानी

    सहायक प्राध्यापक (हिन्दी), कलिंगा विश्वविद्यालय, नया रायपुर, छत्तीसगढ़

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Published

19-07-2026

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Section

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How to Cite

आधुनिक छत्तीसगढ़ी कथा साहित्य में लोकतत्त्वीय प्रवृत्तियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 3(6), 115-123. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/321

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