वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना

Authors

  • Dr. Geeta Devi Author

Keywords:

वसुधैव, कुटुम्बकम्

Abstract

वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है  जो महा उपनिषद सहित कई ग्रन्थों में लिपिबद्ध है। इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एव कुटुम्बकम्)। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है।अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैवकुटुम्बकम् ॥ (महोपनिषद् अध्याय ६, मंत्र ७१)अर्थ - यह मेरा अपना है और यह नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त (सञ्कुचित मन) वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों के लिए तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है।

अर्थात् यह संपूर्ण पृथ्वी हमारे लिए अपने घर के समान है चाहे कोई आस्ट्रेलिया में हो, अमेरिका में हो या विश्व के किसी भी कोने में विद्यमान हो वह व्यक्ति हमारे लिए माता, बहन, बन्धु एवं मित्र के समान है |वसुधैव कुटुंबकम का दर्शन एक बेहतर दुनिया के लिए एक दृष्टिकोण प्रदान करता है जो करुणा, सहयोग, व्यक्तिगत जिम्मेदारी, विविधता, समावेशिता, संघर्ष समाधान, पर्यावरणीय प्रबंधन, सामाजिक न्याय, नवाचार और रचनात्मकता के सिद्धांतों पर बनाया गया है। यह प्रेम, दया और सम्मान के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित एक अधिक न्यायसंगत और बेहतर दुनिया बनाने के लिए एक दिशा प्रदान करता है।यह सामाजिक न्याय और समानता पर बहुत जोर देता है। यह असमानता और भेदभाव को खत्म करने और एक ऐसी प्रणाली बनाने के महत्व को पहचानता है जो सभी के लिए निष्पक्षता और न्याय को बढ़ावा देती है।

Author Biography

  • Dr. Geeta Devi

    Assistant Professor (Sanskrit Dept.), Maharani Padmavati Govt. College for Women, Shahzadpur (Ambala)

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Published

16-07-2026

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How to Cite

वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 3(6), 69-74. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/310

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