होरा ज्योतिष में ग्रहों के आधिपत्य और मानव ऊर्जा चक्र का अंतर्संबंध: एक विश्लेषणात्मक यथार्थ-अन्वेषण

Authors

  • Parhlad Singh Ahluwalia Author

Keywords:

होरा ज्योतिष, ग्रहाधिपत्य, चक्र, ऊर्जा शरीर, कुण्डलिनी, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, आलोचनात्मक विश्लेषण

Abstract

भारतीय ज्योतिष परम्परा में होरा शास्त्र ग्रहों को नवग्रह के रूप में प्रतिष्ठित करता है, जिनमें से प्रत्येक ग्रह को विशिष्ट भाव, राशि और गुणों का “आधिपत्य” (स्वामित्व) प्राप्त होता है। समानान्तर रूप से, योग एवं तंत्र परम्परा शरीर के भीतर सात प्रमुख ऊर्जा-केन्द्रों अर्थात् चक्रों की अवधारणा प्रस्तुत करती है। लोकप्रिय एवं अर्ध-लोकप्रिय साहित्य में प्रायः यह दावा किया जाता है कि प्रत्येक ग्रह किसी विशिष्ट चक्र का “शासक” है और ग्रह-दशा का प्रभाव संबंधित चक्र की सक्रियता अथवा अवरोध के रूप में प्रकट होता है। प्रस्तुत शोध-पत्र इस दावे की उत्पत्ति, शास्त्रीय आधार, और वर्तमान वैज्ञानिक साहित्य के आलोक में समालोचनात्मक समीक्षा करता है। अध्ययन की पद्धति साहित्य-समीक्षा (narrative-cum-systematic) है, जिसमें शास्त्रीय संस्कृत स्रोत, आधुनिक ज्योतिषीय व्याख्याएँ, योग-विज्ञान संबंधी अकादमिक शोध, तथा ज्योतिष की वैज्ञानिक परीक्षा संबंधी अध्ययन सम्मिलित किए गए हैं। परिणाम दर्शाते हैं कि जहाँ चक्र-प्रणाली का स्नायु-अंतःस्रावी तंत्र (neuro-endocrine system) के साथ एक रूपकात्मक एवं आंशिक शारीरिक समरूपता (anatomical correspondence) स्थापित करने के प्रयास आधुनिक योग-चिकित्सा साहित्य में हुए हैं, वहीं ग्रह-चक्र पत्राचार की अवधारणा का कोई प्रत्यक्ष शास्त्रीय प्रमाण बृहत्पराशर होराशास्त्र जैसे मूल ग्रंथों में उपलब्ध नहीं है — यह अवधारणा बीसवीं शताब्दी के पश्चात्वर्ती (post-20th-century) समन्वयवादी (syncretic) ज्योतिष-योग साहित्य में विकसित हुई प्रतीत होती है। नियंत्रित वैज्ञानिक परीक्षणों (यथा कार्लसन का द्वि-अंध परीक्षण) में ज्योतिषीय भविष्यकथन की सांख्यिकीय वैधता सिद्ध नहीं हो सकी है, जबकि योग-अभ्यास के स्वायत्त तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव हेतु नियंत्रित साक्ष्य उपलब्ध हैं। अतः यह शोध-पत्र प्रस्तावित करता है कि ग्रह-चक्र अंतर्संबंध को एक सांस्कृतिक-प्रतीकात्मक संश्लेषण (cultural-symbolic synthesis) के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि एक अनुभवसिद्ध (empirically verified) वैज्ञानिक तथ्य के रूप में।

 

Author Biography

  • Parhlad Singh Ahluwalia

    Dr. Bhim Rao Ambedkar Law University, Jaipur, Rajasthan

     

Downloads

Published

16-10-2026

How to Cite

होरा ज्योतिष में ग्रहों के आधिपत्य और मानव ऊर्जा चक्र का अंतर्संबंध: एक विश्लेषणात्मक यथार्थ-अन्वेषण. (2026). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 4(1), 120-137. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/348

Similar Articles

21-30 of 121

You may also start an advanced similarity search for this article.

Most read articles by the same author(s)

1 2 3 4 5 6 > >>