डॉ. अंबेडकर के धार्मिक और सामाजिक विचारधारा की वर्तमान में प्रासंगिता

Authors

  • डाॅ. सुदेश Author

Keywords:

डाॅ. अंबेडकर , समाज , धर्म , मूल्य व बंधुत्व

Abstract

वर्तमान में हमारे लिए डाॅ. अंबेडकर के धार्मिक व सामाजिक विचारों पर फिर से नजर डालना जरूरी हो गया है। भारत के परिदृश्य पर तेजी से छा रहे असहिष्णुता को रोकने के लिए डा.ॅ अंबेडकर की विचाराधारा हमारी मदद कर सकती है। वर्तमान में चल रही इस असहनशील विचाराधारा के निशाने पर देश की शान्ति ही नहीं है अपितु अहिंसा, भातृभाव व सदियों से चली आ रही गंगा-जमुना तहजीब भी है। इसके अतिरिक्त डाॅ. अंबेडकर हमें धर्म की समालोचना करने और एक परिघटना के रूप में धर्म को समझने में सहायक हो सकते हैं। डाॅ. अंबेडकर के धर्म संबंधी विचारों का पर्याप्त अध्ययन नहीं हुआ है। इसके दो कारण हैं - पहला यह कि एक लंबे अर्से से भारत में धर्म पर विचार केवल ‘हिन्दू-मुस्लिम प्रश्न’ तक सिमट कर रह गया है और दूसरा, क्योंकि ‘प्रगतिशीलों’ ने हमेशा धर्म को नजरअंदाज किया है। एक ओर उदारवादी यह कहते रहे कि धर्म, व्यक्ति का निजी मामला है और होना चाहिए, इसलिए उस पर सार्वजनिक विचार-विमर्श का कोई अर्थ नहीं है। जबकि दूसरी तरफ माक्र्सवादियों का यह तर्क रहा है कि धर्म एक फरेब है, जो लोगों को उनके असली आर्थिक हितों को समझने से रोकता है। परंतु क्या हम इस तथ्य को नजरअंदाज कर सकते हैं कि धर्म आज भी हमारी राजनीति और सामान्य लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। धर्म मनुष्य में आशा और दृढ़ विश्वास उत्पन्न करता है। धर्म और समाज आपस में जुड़े हुए है, धर्म मनुष्य के लिए आवश्यक माना गया है। धर्म के नाम पर किसी आडम्बर या पाखंड को स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय पर आधारित धर्म ही सच्चा धर्म है। डाॅ. अंबेडकर, धर्म के कटु और निर्भीक आलोचक तो थे ही, इसके साथ-साथ उन्हें धर्म की गहरी समझ भी थी। यह अनूठा था, क्योंकि उनके समय में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोग या तो धर्म को बांटने वाला और अतार्किक कहकर उनकी आलोचना करते थे या गांधी जी की तरह, यह मानते थे कि सभी धर्म सच्चे और हमारे सम्मान के पात्र हैं। आधुनिक भारत में सर्वधर्म समभाव की परिकल्पना अर्थात राज्य द्वारा सभी धर्मों को एक दृष्टि से देखना - धर्मनिरपेक्षता की कसौटी बन गई है।

Author Biography

  • डाॅ. सुदेश

    सहायक प्रवक्ता-इतिहास, महिला महाविधालय, झोझू कलां, चरखी दादरी, हरियाणा।

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Published

03-05-2024

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How to Cite

डॉ. अंबेडकर के धार्मिक और सामाजिक विचारधारा की वर्तमान में प्रासंगिता. (2024). Siddhanta’s International Journal of Advanced Research in Arts & Humanities, 48-58. https://sijarah.com/index.php/sijarah/article/view/78

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